इस सूफी संत की मजार पर जमकर मनाई जाती है होली-दिवाली, खत्म हो जाता है हिंदू-मुस्लिम का भेद!

मुस्लिम भी यहां जमकर होली खेलते हैं और धूमधाम से दिवाली मनाते हैं। ये जगह है देवा शरीफ। लखनऊ से 25 किलोमीटर दूर ऐसी जगह है जहां आपको हिंदू-मुस्लिम का भेद पता ही नहीं चलेगा  

बाराबंकी: जिले में स्थित देवा या देवा शरीफ एक छोटा सा स्थान है लखनऊ से 25 किलोमीटर दूर जहां हाजी वारिस अली शाह की दरगा है। इस दरगाह में जियारत करने दुनियाभर से लोग आते हैं। हाजी वारिस अली शाह की दरगाह मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों का प्रमुख स्थान है। इस दरगाह परिसर के भीतर एक मस्जिद और एक खानका भी है। देवा शरीफ दरगा के बारे में एक अनोखा तथ्य यह है कि यहां होली-दिवाली बहुत धूमधाम से मनाई जाती है। लोग खुद को गुलाल से रंगते हैं और यह आयोजन हर साल बहुत बड़ा और भव्य होता है। सूफी संत हाजी वारिस अली शाह का मकबरा एक शानदार स्मारक के भीतर  है जो बेहतरीन वास्तुकला का उदाहरण है। हर साल उर्स के मौके पर विशेष रूप से दरगा में भीड़ रहती है। हर साल अक्टूबर-नवंबर के महीने में दस दिनों के लिए ये जगह गुलजार रहती है।

देवा शरीफ में उर्स का त्योहार बड़ा वार्षिक आयोजन होता है जब उनकी स्मृति में 10 दिनों के लिए उत्सव मनाया जाता है। यह आयोजन अक्टूबर-नवंबर के महीनों के दौरान होता है और त्योहार के दौरान पर्यटकों के लिए हस्तशिल्प और स्मृति चिन्ह के लिए कई सरकारी दुकानें भी लगती है।

इतिहास यह बताता है कि हाजी वारिस अली शाह भाईचारे में विश्वास करते थे और उन्होंने इस बात की वकालत की कि हर धर्म समान रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों को पूरे उत्साह और भक्ति के साथ अपने व्यक्तिगत विश्वासों और धर्मों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने प्रेम, एकता और भक्ति की भावना को बढ़ावा दिया और होली-दिवाली की परंपरा की शुरुआत की जो आज भी चलती है।

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