बस इक्का-दुक्का दुकानदार ही जानते हैं 'खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन ' ( एफएसडीए) को!


रिया सिंह  की रिपोर्ट

लखनऊ : 'खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन' ( एफएसडीए) को शहर गांव कस्बे के ज्यादातर दुकानदार या तो नही जानते या जो जानते भी हैं, वे मौजूदा प्रशासनिक अधिकारी, फूड इंस्पेक्टर या उनके मौजूदा मुख्य या क्षेत्रीय दफ्तर के बारे में नही जानते। और इस विभाग या अपने व्यवसाय से जुड़े नियमों, मानकों को पूरी तरह नहीं जानते!

गौरतलब है कि हर शहर गांव कस्बे बाजारों में तमाम कच्चे पक्के खाने पीने की दुकानें होती हैं।अनाज, दालें, आटा, मैदा, बेसन, मसाले आदि के साथ चाय, काॅफी, दूध, दही, पनीर, घी, मिठाई, होटल, गोस्त आदि के व्यवसाय में हजारों लोग होते हैं। जो दुकानों या कारखानों के जरिए काम कर रहे हैं। ऐसे तमाम लोगों पर मानकों के आधार पर काम करने और कारखाने के लिए सरकार ने 'खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन' नामक विभाग बना रखा है, जिसके हर शहर में दर्जनों अधिकारी, कर्मचारी काम करते हैं। 

लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि, अधिकांश दुकानदार इस विभाग और इसके कार्य के बारे में नहीं जानते, वे व्यवसाई न वो मानकों के आधार पर काम कर रहे हैं और न खुद अपनी खामियों के बारे में जानते हैं। बाजारों में जो इक्का दुकानदार इसके बारे में जानते भी हैं उन्होंने सब 'सैट' कर रखा है। ऐसी तमाम जगहों पर,  खास जगह पर अधिकारी कर्तव्य पालन करने जाते हैं और 'संतुष्ट' होकर वापस आ जाते हैं।

औषधि प्रशासन विंग का भी यही हाल है, शहरों में सैकड़ों मेडिकल स्टोर ऐसे हैं जिनके पास न लाइसेंस है और न ही वे मानक के आधार पर सही हैं पर वे भी धड़ल्ले से अपना व्यापार कर रहे है। उन्होंने भी सब 'सैट' कर रखा है।
हमने जब इस संबंध में एफएसडीए अधिकारीयों से बात की तो कई जिम्मेदार अधिकारियों कुछ बताने से इंकार कर दिया या ठीक से जवाब नही दिया। 

कुछ बड़े पद पर बैठे अधिकारी जैसे डॉ. एस पी सिंह (खाद्य), माधुरी सिंह (औषधि) आदि ने बताया कि हमारे पास जब कि हम समय समय पर जांच करते हैं और कोई कमी पाते हैं या कोई शिकायत आती है तब कारवाई करते हैं।

हमने लखनऊ राजधानी जैसे शहर के कई ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र में खाद्य और औषधि से जुड़े विभाग और कारोबार में बहुत खामियां पाईं, बहुत लापरवाही पाईं, और बहुत खेल पाए। 
सरकार को जल्द से जल्द इस विभाग पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि लोगों के स्वास्थ्य और सरकार को प्राप्त होने वाले राजस्व के साथ खेल न हो।

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