दुष्प्रचार और अफवाह रूपी महामारी से भी खतरा, भारत को इस पर विराम लगाने की जरूरत

 भारत में 114 दिनों में 17 करोड़ लोगों को टीके लगाए गए। अमेरिका को यह लक्ष्य हासिल करने में 115 और चीन को 119 दिन लगे। मंत्रालय ने बताया कि केंद्र द्वारा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को टीकों का आवंटन आगामी पखवाड़े के दौरान खपत और दूसरा टीका लगवाने वालों की संख्या के आधार पर किया जाता है।

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान जिस तेजी से अफवाहें चल रही हैं और सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है उसके पीछे भारत की छवि बिगाड़ने का एक बड़ा अभियान है जो यह नहीं चाहता कि केंद्र की मोदी सरकार की सफलता के झंडे विश्व भर में गाढ़े जाएं। इसीलिए कभी कोरोना से निबटने के नाम पर, कभी ऑक्सीजन कमी और टीके की कमी के नाम पर सरकार को घेरा जाता है। खास बात यह है कि जो विषय राज्य के हैं उनकी कमियों के लिए भी केंद्र सरकार को ही घेरा जाता है। प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में हमने भारत और सरकार के खिलाफ चल रहे दुष्प्रचारों का जवाब ढूँढ़ने का प्रयास किया है। देश में जारी कोरोना महामारी के बीच सरकार से सवाल पूछे जा रहे है। क्या सरकार समय रहते कोरोना की दूसरी लहर को समझने में नाकाम रही? क्या केंद्र की ओर से राज्यों को सचेत नहीं किया गया? कोरोना वैक्सीन विदेश क्यों भेजे गए? कोरोना के नए मामले और मौत के आंकड़े क्या छुपाए जा रहे है?

कोरोना को लेकर राजनीति भी तेज है। विपक्ष टीकाकरण नीति को लेकर सरकार से सवाल कर रहा है। विपक्ष सेंट्रल विस्टा परियोजना को रोकने की मांग कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि पांच राज्यों में चुनाव की वजह से देश में कोरोना फैला। कोरोना काल में कुंभ के आयोजन पर भी सवाल है। साथ ही साथ अब केंद्र सरकार से टीकाकरण को लेकर ग्लोबल टेंडर किए जाने की मांग की जा रही है। अफवाहों और आरोपों के दौर में यह बात भी सच है कि भारत कोरोना की भीषण आपदा में भी डटकर मुकाबला कर रहा है। 

राहत की बात यह है कि फिलहाल इस सप्ताह कोरोना के नए मामलों में कमी देखी गई है। हालांकि मौत के आंकड़े अब भी ज्यादा हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि धीरे-धीरे कोरोना वायरस अपने ढलान पर जाएगा। इन सबके बीच कई राज्यों में लगे लॉकडाउन को बढ़ाया गया है। कई राज्यों की ओर से ब्लैक मार्केटिंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र की ओर से भी राज्यों को मदद करने की लगातार कोशिश की जा रही है। केंद्रीय टीम ज्यादा संक्रमण वाले राज्यों का दौरा कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कोरोना से प्रभावित 100 जिलों के जिलाधिकारियों के साथ भी बैठक करेंगे। कोरोना के नए मामलों में कमी के कारण फिलहाल ऑक्सीजन, रेमडेसीविर जैसी महत्वपूर्ण चीजों के लिए फिलहाल मारामारी में कमी देखी जा रही है। अस्पतालों में बेड उपलब्ध हो रहे हैं।

भारत हिम्मत हारने वाला देश नहीं है, हम लड़ेंगे और जीतेंगे: नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत वित्तीय लाभ की 8 वीं किस्त जारी की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने अपना संबोधन भी दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि 100 साल बाद आई इतनी भीषण महामारी कदम कदम पर दुनिया की परीक्षा ले रही है। उन्होंने कहा कि हमारे सामने एक अदृश्य दुश्मन है। हम अपने बहुत से करीबियों को खो चुके हैं। बीते कुछ समय से जो कष्ट देशवासियों ने सहा है, वो मैं भी उतना ही महसूस कर रहा हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि  भारत हिम्मत हारने वाला देश नहीं है, भारत और कोई भारतवासी हिम्मत नहीं हारेगा। हम लड़ेंगे और जीतेंगे।

मोदी ने कहा कि देश का प्रधानसेवक होने के नाते आपकी हर भावना का मैं सहभागी हूं। कोरोना की सेकंड वेव से मुकाबले में संसाधनों से जुड़े जो भी गतिरोध थे वो तेजी से दूर किये जा रहे हैं, युद्ध स्तर पर काम करने का प्रयास हो रहा है। देश के डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, सफाई कर्मी, एंबुलेंस ड्राइवर, लैब कर्मचारी, ये सभी एक-एक जीवन को बचाने के लिए 24 घंटे जुटे हैं। आज देश में जरूरी दवाओं की आपूर्ति बढ़ाने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है। ऑक्सीजन रेल ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई को बहुत बड़ी ताकत दी है। देश के दूर सुदूर हिस्सों में ये स्पेशल ट्रेन ऑक्सीजन पहुंचने में जुटी हैं।

मोदी ने कहा कि इस संकट के समय में दवाएं और जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी में भी कुछ लोग लगे हैं।  मैं राज्य सरकारों से आग्रह करूंगा कि ऐसे लोगों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए। ये मानवता के खिलाफ कृत है। उन्होंने कहा कि कोरोना से बचाव का एक बहुत बड़ा माध्यम है, कोरोना का टीका। केंद्र सरकार और सारी राज्य सरकारें मिलकर ये निरंतर प्रयास कर रही हैं कि ज्यादा से ज्यादा देशवासियों को तेजी से टीका लग पाए। देशभर में अभी तक करीब 18 करोड़ वैक्सीन डोज दी जा चुकी हैं। देशभर के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त टीकाकरण किया जा रहा है। इसलिए जब भी आपकी बारी आए तो टीका जरूर लगवाएं। ये टीका हमें कोरोना के विरुद्ध सुरक्षा कवच देगा, गंभीर बीमारी की आशंका को कम करेगा। मास्क और दो गज की दूरी के मंत्र को हमें छोड़ना नहीं है।

राहुल गांधी ने फिर साधा पीएम मोदी पर निशाना, कहा- वैक्सीन,ऑक्सीजन के साथ पीएम भी गायब

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि ऐसे समय में जब देश कोविड-19 महामारी का सामना कर रहा है, टीके, ऑक्सीजन और दवाओं के साथ वह खुद भी गायब हैं। राहुल ने एक ट्वीट कर कहा, ‘‘वैक्सीन, ऑक्सीजन और दवाओं के साथ साथ प्रधानमंत्री भी ग़ायब हैं। बचे हैं तो बस सेंट्रल विस्टा, दवाओं पर जीएसटी और यहां-वहां प्रधानमंत्री की फ़ोटो।’’ ज्ञात हो कि कोविड-19 के प्रबंधन को लेकर राहुल गांधी प्रधानमंत्री पर लगातार हमले बोल रहे हैं और देश में संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनजर ऑक्सीजन, दवाओं और टीकों की हो रही कमी के लिए सरकार की आलोचना कर रहे हैं।

12 विपक्षी दलों ने पीएम मोदी को लिखा खत, मुफ्त वैक्सीनेशन और सेंट्रल विस्टा परियोजना को रोकने की मांग की

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा समेत 12प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने कोरोना महामारी की गंभीर स्थिति को लेकर चिंता जताई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि केंद्र सरकार वैश्विक एवं घरेलू स्तर के सभी स्रोतों से टीकों की खरीद करे तथा देश के सभी नागरिकों को मुफ्त में टीका लगाया जाए। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में इन नेताओं ने सभी देशवासियों को मुफ्त में टीका लगाने की व्यवस्था करने, सेंट्रल विस्टा परियोजना को रोककर इसका पैसा टीकाकरण के लिए इस्तेमाल करने, तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने, ‘पीएम केयर्स’ कोष की पूरी राशि का इस्तेमाल जरूरी चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए करने और सभी बेरोजगार लोगों को प्रति माह 6,000 रुपये प्रदान की मांग भी की है। कांग्रेस की तरफ से सोनिया और जनता दल (एस) की तरफ से देवगौड़ा के अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, शिवसेना प्रमुख एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, द्रमुक नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन तथा झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता एवं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यह पत्र लिखा है। 

इनके अलावा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला, भाकपा महासचिव डी राजा और माकपा महासचिव सीताराम येचुरी भी यह साझा पत्र भेजने वाले नेताओं में शामिल हैं। इन नेताओं ने पत्र में कहा, ‘‘देश में कोरोना महामारी अप्रत्याशित स्तर के मानवीय संकट का रूप ले चुकी है। हमने अतीत में भी आपका ध्यान उन कदमों की ओर खींचा जिन्हें केंद्र सरकार की ओर से उठाया जाना और लागू किया जाना जरूरी है। दुर्भाग्यवश आपकी सरकार ने सभी सुझावों को नजरंदाज कर दिया या फिर मानने से इनकार कर दिया। इस तरह से स्थिति भयावह मानवीय त्रासदी की तरफ बढ़ गई।’’ उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया, ‘‘केंद्र के स्तर पर वैश्विक और घरेलू सभी उपलब्ध स्रोतों से टीकों की खरीद की जाए। तत्काल पूरे देश में सभी के लिए मुफ्त टीकाकरण की शुरुआत की जाए। टीकों के घरेलू निर्माण को बढ़ाने के लिए जरूरी लाइसेंस दिए जाएं।’’ 

विपक्षी नेताओं ने यह मांग भी की, ‘‘बजट में आवंटित 35,000 करोड़ रुपये टीके के लिए खर्च किए जाएं। सेंट्रल विस्टा परियोजना पर रोक लगाई जाए। इसके लिए तय राशि का इस्तेमाल ऑक्सीजन और टीके की खरीद में किया जाए। बिना लेखा-जोखा वाले ट्रस्ट फंड ‘पीएम केयर्स’ में मौजूद सारी राशि का इस्तेमाल टीके, ऑक्सीजन और जरूरी चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए किया जाए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सभी बेरोजगार लोगों को 6,000 रुपये महीने दिए जाएं। जरूरतमंद लोगों को केंद्र सरकार के अन्न गोदामों से अनाज मुहैया कराया जाए। तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किया जाए ताकि लाखों अन्नदाता महामारी से बच सकें और भारतीय नागरिकों को खिलाने के लिए अन्न पैदा कर सकें।’’ विपक्ष के प्रमुख नेताओं ने कहा, ‘‘ हम उम्मीद करते हैं कि भारत और हमारी जनता के हित में इन सुझावों को आपकी तरफ से सराहा जाएगा।

पीएम मोदी को पत्र लिख ममता बनर्जी ने कोविड-19 संबंधित दवाओं पर सीमा शुल्क में छूट देने की अपील की

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे कोविड-19 महामारी से लड़ने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और दवाइयों पर सभी तरह के करों और सीमा शुल्क में छूट देने का अनुरोध किया। बनर्जी ने मोदी से स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा मजबूत करने और कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए उपकरण, दवाओं तथा ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने का भी अनुरोध किया। उन्होंने पत्र में कहा, ‘‘बड़ी संख्या में संगठन, लोग और परोपकारी एजेंसियां ऑक्सीजन सांद्रक, सिलेंडर, कंटेनर और कोविड संबंधित दवाएं दान देने के लिए आगे आयी हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘कई दानदाताओं ने इन पर सीमा शुल्क, एसजीएसटी, सीजीएसटी, आईजीएसटी से छूट देने पर विचार करने के लिए राज्य सरकार का रुख किया है।’’ बनर्जी ने कहा, ‘‘चूंकि इनकी कीमतें केंद्र सरकार के कार्य क्षेत्र में आती है तो मैं अनुरोध करती हूं कि इन सामान पर जीएसटी/सीमा शुल्क और अन्य ऐसे ही शुल्कों तथा करों से छूट दी जाए ताकि कोविड-19 महामारी के कुशल प्रबंधन में उपरोक्त जीवनरक्षक दवाओं और उपकरणों की आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिल सके।’’ 

स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेक इन इंडिया वेंटिलेटर वाली मीडिया रिपोर्टों को बताया आधारहीन

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उन मीडिया रिपोर्टों को आधारहीन और त्रुटिपूर्ण करार दिया है जिसमें इस बात का दावा किया गया है कि मेक इन इंडिया अभियान के तहत महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में बने वेंटिलेटर ठीक ढंग से काम नहीं कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को ऐसी मीडिया रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा कि पिछले वर्ष महामारी की शुरुआत में देश में उपलब्ध वेंटिलेटरों की संख्या काफी सीमित थी और देश में भी वेंटिलेटर का निर्माण काफी कम हो रहा था। इसके अलावा विदेश के अधिकतर आपूर्तिकर्ता ऐसी स्थिति में नहीं थे कि भारत को वेंटिलेटर की आपूर्ति कर सकें। इसी कारण मौजूदा स्थिति और देश में बढ़ती हुई मांग को देखते हुए स्थानीय निर्माताओं को मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत वेंटिलेटर बनाने के लिए कहा गया। उपलब्ध सीमित समय के भीतर वेंटिलेटर के नमूनों के तकनीकी और अन्य पहलुओं की जांच करने के अलावा विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही मंजूरी प्रदान की गयी। उनके नमूनों की गहन जांच के बाद निर्माण की अनुमति दी गयी और उसके बाद ही आपूर्ति की गयी। मंत्रालय ने कहा कि कुछ ऐसे राज्य हैं जिन्हें वेंटिलेटर मिल चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें इस्तेमाल में लाया नहीं गया है। इस संबंध में केन्द्रीयस्वास्थ्य सचिव ने 11 अप्रैल को सात ऐसे राज्यों को पत्र भी लिखा था। ऐसे राज्यों को जल्द से जल्द वेंटिलेटर उपयोग में लाने की सलाह दी गयी है। मंत्रालय के मुताबिक ज्योति सीएनसी की ओर से निर्मित वेंटिलेटर ही औरंगाबाद मेडिकल कॉलेज को दिए गए। ज्योति सीएनसी मेक इन इंडिया के तहत वेंटिलेटर का निर्माण करने वाली एक इकाई है।

राज्यों को 10,796 आक्सीजन सांद्रक, 12,269 आक्सीजन सिलेंडर, 4.22 लाख रेमडेसिविर शीशियां भेजी गई : सरकार

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि 27 अप्रैल से 13 मई तक वैश्विक सहायता के रूप में प्राप्त चिकित्सा सहायता के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सड़क एवं हवाई मार्ग से 10,796 ऑक्सीजन सांद्रक, 12,269 ऑक्सीजन सिलेंडर, 19 ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र, 4.22 लाख रेमडेसिविर की शीशियां भेजी गई हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के बयान के अनुसार, ‘‘ केंद्र सरकार समग्र सरकार के दृष्टिकोण के तहत वैश्विक सहायता को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक अविलंब आवंटित करने और पहुंचाने के लिए लगातार कार्यरत है।’’ 12 एवं 13मई को इंडोनेशिया, लक्जमबर्ग, ओमान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, फिनलैंड, ग्रीस आदि देशों से महत्वपूर्ण चिकित्सा सहायता प्राप्त हुई थी जिसमें 1506 आक्सीजन सांद्रक, 434 आक्सीजन सिलेंडर और 58 वेंटिलेटर/बीआई पीएपी शामिल है। मंत्रालय के अनुसार, 27 अप्रैल से 13 मई तक 10,796 ऑक्सीजन सांद्रक, 12,269 ऑक्सीजन सिलेंडर, 19 ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र, 6,497 वेंटिलेटर/बीआई पीएपी तथा लगभग 4.22 लाख रेमडेसिविर की शीशियां राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सड़क तथा हवाई मार्ग से वितरित/भेजे जा चुके हैं स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि वह इसकी समग्र रूप से निगरानी कर रही है। 

राज्यों को अगले 15 दिनों में 192 लाख कोविड-19 रोधी टीके निशुल्क देगा केंद्र : स्वास्थ्य मंत्रालय

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 16 मई से 31 मई तक कोविड-19 रोधी टीकों कोविशील्ड और कोवैक्सीन की कुल 191.99 लाख खुराक निशुल्क दी जाएगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि टीकों के आवंटन के बारे में पहले ही बता दिया जाएगा। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि आवंटित टीकों का तार्किक और उचित इस्तेमाल किया जाए तथा टीके की बर्बादी कम से कम हो। टीकों की 191.99 लाख खुराकों में 162.5 लाख कोविशील्ड टीके और 29.49 लाख कोवैक्सीन टीके शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत सरकार द्वारा 15 दिनों के लिए निशुल्क दिए जाने वाले टीकों के बारे में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सूचित करनेका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वे 45 साल और उससे अधिक आयु वर्ग के लिए इन निशुल्क टीकों के उचित इस्तेमाल की योजनाएं बना सकें।’’ केंद्र ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एक मई से 15 मई तक 1.7 करोड़ से अधिक टीके निशुल्क उपलब्ध कराए थे। मंत्रालय ने बताया कि राज्यों को मई में 4.39 करोड़ से अधिक टीके सीधे खरीदने के लिए उपलब्ध कराए। शुक्रवार को सुबह सात बजे तक मिली रिपोर्ट के अनुसार, देश में करीब 18 करोड़ लोगों को कोविड-19 रोधी टीके लगाए जा चुके हैं। भारत में 114 दिनों में 17 करोड़ लोगों को टीके लगाए गए। अमेरिका को यह लक्ष्य हासिल करने में 115 और चीन को 119 दिन लगे। मंत्रालय ने बताया कि केंद्र द्वारा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को टीकों का आवंटन आगामी पखवाड़े के दौरान खपत और दूसरा टीका लगवाने वालों की संख्या के आधार पर किया जाता है।

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