मार्शल के कामों के बारे में रोचक फैक्ट्स, संसद में कैसे होती है इनकी नियुक्ति?

राज्यसभा के मार्शल की पहचान तब स्पष्ट रूप से दिखाई और सुनाई देती है। जब सदन शुरू होता है। सभापति के आसंदी पर पहुंचने से पहले आवाज लगाने वाले शख्स " माननीय सदस्यों, माननीय सभापति जी" कहने वाले मार्शल ही होते। मार्शल्स यानी वो दो लोग जो राज्यसभा में चेयरमैन और लोकसभा में स्पीकर के अगल-बगल में खड़े होते हैं।




मांग रहा है हिन्दुस्तान, रोटी कपड़ा और मकान। कभी ये नारा लगा करता था और बात होती थी इंसान की बुनियादी जरूरतों की। पर कैलेंडर बदल गया। वहां मान, अपमान और सम्मान को लेकर बहस तेज हो गई। संसद की कार्यवाही जिससे देश को बहुत कुछ हासिल होता है। इसी हासिल में एक होता है किसी नेता का उभरना, लोकनीतियों के लिए बिल का गढ़ना और आतंरिक और बाहरी शक्तियों से कैसे मिलकर है लड़ना। हमारी विधायिकी और इस नाते हमारे लोकतंत्र का घर है संसद। इस घर में 20 सितंबर को खेती से जुड़े किसानों के बिल को पास कराने के दौरान ऐसा बहुत कुछ हुआ जो नहीं होना चाहिए था। 


राज्यसभा में दो कृषि विधेयकों पर चर्चा के दौरान जमकर बवाल हुआ। इस दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने तो एक अनोखे तरीके से इस विधेयक का विरोध किया। संजय सिंह उप सभापति की कुर्सी के सामने आकर जोर-जोर से ताली पीटने लगे और इस बिल का पुरजोर विरोध करने लगे। ऐसे में उपसभापति को सदन के अंदर मार्शल को बुलाना पड़ा। जिसके बाद मार्शल आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह को कंधे पर उठाकर बाहर ले गए। हालांकि, वहां पर मौजूद अन्य नेताओं ने इसका भी विरोध किया और मार्शल ने बाद में संजय सिंह को छोड़ दिया। हंगामे के बीच संजय सिंह ने एक मार्शल को गर्दन से पकड़ा और फिर लात घूसे भी चलाए। उनका ये वीडियो स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने शेयर किया है।


इसी तरह ही कुछ इस बिल के ऊपर चर्चा के दौरान टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन भी बिल के विरोध में वेल में पहुंच गए। उन्होंने उपसभापति को रूल बुक दिखाया और नारेबाजी की। फिर उपसभापति के सामने ही रूल बुक को फाड़ दिया और माइक तोड़ दिया। उपसभापति के पास खड़े हुए मार्शल ने उनको उपसभापति के पास से हटाया। इन शर्मनाक घटनाक्रम के दौरान जिन मार्शल का जिक्र बार-बार हुआ। चाहे वो उपसभापति के पास से सांसदों को हटाना हो या माननियों को कंधे पर उठाकर सदन के बाहर ले जाना हो। 


राज्यसभा के मार्शल की पहचान तब स्पष्ट रूप से दिखाई और सुनाई देती है। जब सदन शुरू होता है। तब सभापति के आसंदी पर पहुंचने से पहले आवाज लगाने वाले शख्स " माननीय सदस्यों, माननीय सभापति जी" कहने वाले मार्शल ही होते हैं। मार्शल्स यानी वो दो लोग जो राज्यसभा में चेयरमैन और लोकसभा में स्पीकर के अगल-बगल में खड़े होते हैं। आखिर ये मार्शल होते कौन हैं, उनकी भर्ती कैसे होती है, उनका काम क्या होता है। इसके बारे में आपको बताते हैं। 


कौन होते हैं मार्शल और क्या है इनका काम


स्पीकर के बाएं ओर खड़ा व्यक्ति मार्शल होता है और दूसरा व्यक्ति डिप्टी मार्शल। लोगों को लगता होगा कि इनका काम चेयर के आदेश पर उपद्रवी सदस्यों को बाहर करना और उपद्रव के दौरान किसी को स्पीकर तक पहुंचने से रोकना होता है। अगर आप भी यही समझते हैं को आप भी गलत हैं। दरअसल, ये मार्शल सदन चलाने में स्पीकर की मदद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


राज्‍यसभा में मार्शल को सदन शुरू होने से पहले सभापति के आने और कार्यवाही के शुरू होने की घोषणा करने की जिम्‍मेदारी दी गई है। इसके अलावा वह यहां पर मौजूद डॉक्‍यूमेंट्स को ठीक से अरेंज करने, बेकार डॉक्‍यूमेंट्स को हटाने और ऑफिसर्स को उनके काम में मदद करने के लिए भी मौजूद रहते हैं। चेयरमैन या स्पीकर की बैठक में मार्शल की मौजूदगी निश्चित होती है। 


प्रश्नकाल के दौरान सवाल पूछने वाले सांसदों के नाम चेयरमैन/स्पीकर को बताना। जिन सांसदों से मौखिक जवाब मांगते हुए सवाल पूछे गए हैं, अगर उनमें से कोई भी अनुपस्थित है तो उसकी जानकारी भी मार्शल ही देते हैं। यानी कुलमिलाकर देखें तो सदन में उपस्थित सभी सदस्यों के नाम याद रखना भी उनकी जिम्मेदारी है। 


इसके साथ ही चेयरमैन या स्पीकर को हर हाल में सुरक्षित रखना उनकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होती है। सदन में मौजूद वॉच एंड वार्ड असिस्टेंट को चकमा देकर अगर कोई आगे बढ़ आए या हंगामा बढ़ जाए तो चेयरमैन/स्पीकर की रक्षा करना मार्शल्स की ही ज़िम्मेदारी है।


लोकसभा जो संसद का निचला सदन है वहां पर मार्शलों को अधिकार होता है कि शोर मचाते सांसदों को बाहर कर दें, राज्‍यसभा में मार्शल सिर्फ नाममात्र के लिए होते हैं। 


मार्शल्स की चयन प्रक्रिया?


मार्शल के पद पर डायरेक्ट भर्ती नहीं होती है। प्रमोशन से ये पद भरे जाते हैं। संसद के लिए सिक्योरिटी असिस्टेंट्स की भर्ती होती है। ग्रेड 2 में प्रमोशन होता है तो ग्रेड 1 में जाते हैं। उसके बाद सीनियर सिक्योरिटी असिस्टेंट बनते हैं। इनका चयन भी एक कठिन प्रक्रिया द्वारा होता है जिसमें संसद के नियमों और प्रक्रियाओं को लेकर इनके ज्ञान को परखा जाता है। 


इससे पहले दिखा था सदन में ऐसा नजारा


08 मार्च 2010 को महिला आरक्षण बिल को राज्यसभा के पटल पर रखा गया, लेकिन सदन में हंगामे और एसपी और राजद द्वारा यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी की वजह से उस पर मतदान नहीं हो सका। इस दौरान सदन में बिल को फाड़ा गया था और वेल में जाकर कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास किया गया था। जिसके बाद  आरजेडी के सुभाश यादव, एजाज़ अली, लोजपा के सबीर अली, वीरपाल सिंह यादव, नंद किशोर यादव, समाजवादी पार्टी के आमिर आलम ख़ान और कमाल अख़तर को निलंबित कर दिया गया था। उस वक्त तो सांसद सदस्य एजाज अली विरोध में सदन में ही लेट गए थे। इन सांसदों को 108 वें संविधान संशोधन विधेयक पर बहस शुरू होने से पहले मार्शलों द्वारा सदन से बेदखल किया गया था। 


साल 2013 में जब संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ, तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के चार सांसद लगातार चिल्लाते हुए कार्यवाही को बाधित कर रहे थे और तेलंगाना को भारत का 29 वां राज्य बनाने के फैसले का विरोध कर रहे थे। सत्तारूढ़ कांग्रेस के पांच सदस्यों के साथ टीडीपी के चार सांसदों को हंगामे के दौरान सत्र के बाकी समय के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया। लेकिन तेदेपा के चार सांसद लोकसभा में बैठे रहे जिसके बाद उन्हें जबरदस्ती मार्श्लस की मदद से बाहर निकाला गया था। 


कुल मिलाकर कहे तो संसद यानी घर। घर यानी आत्मियता, अदब, मान, मर्यादा, सलाह-मशवरा, बातचीत और सदन अगर संसद का हो तो वहां क्या होना चाहिए। ये राज्यसभा के चेयरमैन वेंकैया नायडू ने सांसदों को याद दिलाया। अगर आपको कोई समस्या है तो चर्चा किजिए, बहस करिए और तय किजिए, शायद यही लोकतंत्र होता है। और लोकतंत्र का मंदिर संसद है तो उसमें यही होना चाहिए।