पिता की तकलीफ देख स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे ने खड़ी की करोड़ों की कंपनी, अब 100 करोड़ कमाने का लक्ष्य

मुंबई के तिलक मेहता ने छोटी सी उम्र में जो मुकाम हासिल किया वह उन्हें बाकी बच्चों से अलग बनाता है. उद्यमी बनने की चाहत रखने वाले तिलक ने पेपर्स एंड पार्सल्स (PnP) नाम से लॉजिस्टिक्स सेवा देने वाली कंपनी शुरू की.



आपको यकीन नहीं होगा कि स्कूल में पढ़ने वाले एक बच्चे ने एक कंपनी खड़ी की और 2 साल में कंपनी का टारगेट 100 करोड़ रुपए पाने का रखा है. जी हां, मुंबई के तिलक मेहता ने छोटी सी उम्र में जो मुकाम हासिल किया वह उन्हें बाकी बच्चों से अलग बनाता है. उद्यमी बनने की चाहत रखने वाले तिलक ने पेपर्स एंड पार्सल्स (PnP) नाम से लॉजिस्टिक्स सेवा देने वाली कंपनी शुरू की. पेपर एंड पार्सल छोटे पार्सलों की डिलीवरी करती है.

ऐसे शुरू हुई कंपनी
तिलक के मुताबिक, पिछले साल मुझे शहर के दूसरे छोर से कुछ किताबों की तत्काल जरूरत थी. पिता काम से थके हुए आये इसलिए मैं उनसे अपने काम के लिए कह नहीं सका और कोई दूसरा ऐसा नहीं था जिसे कहा जा सकता था. इसी आइडिया को बिजनेस बनाकर कंपनी खड़ी हुई.


तिलक ने ये आइडिया एक बैंकर को बताया. बैंकर को वह आइडिया पसंद आया और उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर तिलक की स्टार्टअप कंपनी को बतौर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अंजाम तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया. पार्सल को 24 घंटों के अंदर गंतव्य तक पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए तिलक ने मुंबई के डब्बा वालों के विशाल नेटवर्क का फायदा उठाया


पीएनपी की सेवाएं ज्यादातर पैथोलॉजी लैब्स, बुटीक शॉप्स और ब्रोकरेज कंपनी जैसे ग्राहक ले रहे हैं. अब तिलक मेहता ने 2020 तक कंपनी का टारगेट 100 करोड़ रुपए रखा है. वहीं वह चाहते हैं कि लॉजिस्टिक्स मार्केट में कंपनी बढ़कर 20 फीसदी तक फैल जाए.

कैसे काम करती है कंपनी
पीएनपी अपना काम मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए करती है. कोरोना संकट के पहले कंपनी में करीब 200 कर्मचारी कार्यरत थे. साथ ही 300 से ज्यादा डिब्बावाले भी जुड़े हुए थे. डिब्बावालों की मदद से कंपनी हर होज 1200 से ज्यादा पार्सल डिलीवर कर रही थी. वहीं अधिकतम 3 किलो तक के ही पार्सल डिलिवर किए जा रहे थे.डब्बावाले एक पार्सल को पहुंचाने के लिए 40 से 180 रुपए तक लेते हैं.


 


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