ऑस्ट्रेलिया ने मारे 10 हजार ऊंट - मोदी तक पहुंची बात, अब होगा...


भीलवाड़ा। पर्यावरण एवं वन्य जीव संरक्षण संस्था पीपुल फॉर  एनिमल्स (पीएफए) की राजस्थान इकाई ने ऑस्ट्रेलिया में पानी की कमी के कारण दस हजार ऊंटों को मारने के आदेश के मामले को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाने की केन्द्र सरकार से मांग की है। 

 

पीएफए के प्रदेश प्रभारी बाबूलाल जाजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को  पत्र लिखकर इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की मांग की है। श्री जाजू ने  कहा कि आस्ट्रेलिया में दस हजार ऊंटों को मारने का निर्णय पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि पहले ही वहां हजारों हेक्टेयर जंगल में आग से करोड़ों पशु पक्षियों के जलकर  मारे जाने एवं लाखों पेड़ पौधों के जलकर खाक होने से पर्यावरण असंतुलित हो  गया है। 

 

ऐसे में पानी की कमी का कारण बताकर ऊंट की हत्या करना मानवता को शर्मसार करना है। उन्होंने ऊंटों की इतनी बड़ी संख्या में निर्मम हत्या करने के आदेश को विश्व के  पर्यावरण तंत्र के लिए घातक बताते हुए कहा कि यह पर्यावरण विनाश का बहुत  बड़ा कारण साबित हो सकता है।

उधर वेटेनरी कॉलेज बीकानेर के प्रोफेसर टी के गहलोत के अनुसार आस्ट्रेलिया के जंगलों में बड़ी संख्या में मौजूद ऊंटों का प्रबंधन नहीं होने की वजह से यह समस्या आई है लेकिन ऐसे में ऊंटों को मारना नहीं चाहिए जबकि उनके लिए पानी की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वहां की सरकार को कोई प्रबंध करना चाहिए।    

 

गहलोत ने कहा कि आस्ट्रेलिया में भारत की तरह ऊंटों को पालने वाली प्रजाति नहीं हैं, जैसे भारत में राइका जाति है, ऐसे में वहां ऊंटों को संभालने वाला नहीं हैं। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में वर्ष 1840 में पहली बार ऊंट लाये गये थे। इसके बाद इनकी तादाद लगातार बढती गई और अब वह लाखों में पहुंच गई। सूखा भी पड़ गया और जंगलों में आग के कारण पानी के स्रोत भी सूखते जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि आस्ट्रेलिया ने पानी की कमी एवं पानी की तलाश में ऊंटों के रिहाइशी इलाकों में जाकर उत्पात मचाने का कारण बताकर हाल में दस हजार ऊंटों को मारने के आदेश दिये थे। 

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