पुलिसकर्मियों को ही सज़ा देने में इतनी जल्दबाजी क्यों!


जितनी जल्दी पुलिसकर्मी, लाइन हाज़िर,बर्खास्त, स्थानांतरित होता है. उतनी जल्दी किसी विभाग का कर्मचारी दंडित नहीं होता है. यह बात ठीक है कि अन्य विभागों की अपेक्षा पुलिसकर्मियों पर जनता की जिम्मेदारी ज्यादा है. परन्तु जनता से जुड़े विभाग, नगर निगम, विद्युत विभाग, जल संस्थान, आदि-आदि के कर्मचारी भी कम लापरवाही नहीं करते! खतरनाक गड्ढों से भरी सड़कों पर जनता वर्षों चलती है. अतिक्रमण के मारे सड़कों का बुरा हाल है. पर क्या मजाल है जो नगर निगम के कर्मचारियों का कोई बाल भी बाँका कर सके. विद्युत विभाग के कर्मचारी जनता को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ते पर उनको कोई सजा जल्दी नहीं मिलती, लगभग यही हाल अन्य विभागों का भी है परन्तु उन विभागों के कर्मचारियों की ओर कोई देखता भी नहीं है. क्या कभी सुना है किसी विभाग के पूरे कर्मचारी बर्खास्त हो गये.


पर ये अवश्य सुना होगा पूरा का पूरा थाना बर्खास्त हो गया. अन्य विभागों के कर्मचारियों की वर्षों जाँच होती है तब कहीं दोषी पाये जाने पर दंडित होता है! परन्तु पुलिस विभाग में दंडित करने में पाँच मिनट भी नहीं लगता. जबकि पुलिस विभाग जन सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विभाग है. मै ये नहीं कहता कि अन्य विभागों की जवाबदेही जनता के प्रति कम है. परन्तु यह भी मानना पड़ेगा कि पुलिस विभाग की जवाबदेही ज्यादा है. प्रश्न यह उठता है कि जब पुलिस विभाग की जवाबदेही जनता के प्रति ज्यादा है तो पुलिसकर्मियों की सजा भी सोच समझ कर तय होनी चाहिये. मेरे पास ऐसे तमाम उदाहरण हैं जिसमें पुलिसकर्मी की गलती न होते हुये भी उसको सजा मिल गई .


अभी एक ताज़ा उदाहरण दो पक्षों में गाली गलौज हल्की मार पीट हुई. आरोपी पक्ष की ओर से एक पत्रकार के दबाव मे पुलिस के कुछ अधिकारियों ने विवेचक से आरोपियों के प्रति नर्मी बरतने को कहा. विवेचक ने अधिकारियों के मौखिक आदेश का पालन करते हुये. आरोपियों के प्रति नर्मी बरती! इसकी सूचना जब पुलिस विभाग के अन्य उच्चाधिकारियों तक पहुँची तो विवेचक को सजा मिल गई! अब कोई मुझे बताये इसमें विवेचक की क्या गलती थी. उसने तो अपने से उपर के अधिकारियों के आदेश का पालन ही किया था. पुलिस विभाग में मातहतों के लिये विभाग के उच्च अधिकारियों के मौखिक आदेश बहुत ही ख़तरनाक होते हैं. किसी एक पक्ष को सन्तुष्ट करने के लिये किसी भी पुलिसकर्मी को बलि का बकरा तुरन्त बना दिया जाता है! यह एक मज़ाक ही कहा जायेगा कि समाज के प्रति एक बहुत ही महत्वपूर्ण विभाग के कर्मचारी को बगैर सफ़ाई दिये जल्दबाजी में सजा दे दी जाती है क्यों?


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