1978 में सीएम बनने के लिए जो शरद पवार ने किया, भतीजे ने दोहराया वही इतिहास

पार्टी छोड़ सत्ता पाने का ये मामला पवार परिवार में पहली बार नहीं हुआ है. 1978 में शरद पवार भी मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के लिए अजित पवार वाली राह पर चले थे.



महाराष्ट्र की राजनीति (Maharashtra Politics) में शनिवार सुबह बड़ा उलटफेर हुआ. शरद पवार (Sharad Pawar) के भतीजे अजित पवार ने अपनी ही पार्टी को झटका दिया. अजित पवार (Ajit Pawar) ने बीजेपी को समर्थन देकर देवेंद्र फडणवीस को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री का ताज पहना दिया और खुद उपमुख्यमंत्री बन गए.


पार्टी छोड़ सत्ता पाने का ये मामला पवार परिवार में पहली बार नहीं हुआ है. आज से ठीक 41 साल पहले 1978 में शरद पवार भी मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के लिए अजित पवार (Ajit Pawar) वाली राह पर चले थे. उन्होंने तब अपनी पार्टी तोड़ी थी.


1977 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी, जनता पार्टी से चुनाव हार गई. हार की जिम्मेदारी लेते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शंकरराव चव्हाण ने इस्तीफा दे दिया. उनकी जगह वसंतदादा पाटिल मुख्यमंत्री बने. बाद में कांग्रेस दो फाड़ हो गई. दोनों हिस्सों ने विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा.


इस चुनाव में जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. लेकिन उसके पास बहुमत नहीं था. इस स्थिति में कांग्रेस के दोनों हिस्सों ने आपस में समझौता कर सरकार बना ली. इस सरकार में शरद पवार (Sharad Pawar) उद्योग और श्रममंत्री थे.


जुलाई 1978 में शरद पवार ने अपनी पार्टी छोड़ दी. इस दौरान वे कुछ विधायकों को तोड़ने में कामयाब रहे. जनता पार्टी ने उन्हें सरकार बनाने के लिए समर्थन दे दिया.


इस तरह पहली बार वे 1978 में 38 साल की उम्र में राज्य के युवा मुख्यमंत्री बनने में कामयाब रहे. इसे प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन कहा गया. बाद में यशवंत राव पाटिल भी शरद पवार (Sharad Pawar) की पार्टी में शामिल हो गए. इंदिरा गांधी के दोबारा सत्‍ता में आने के बाद फरवरी 1980 में पवार के नेतृत्‍व वाली प्रोग्रेसिव डेमोक्रैटिक फ्रंट सरकार गिर गई. अगले चुनाव में कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिला. कांग्रेस की तरफ से अब्दुल रहमान अंतुले को मुख्यमंत्री बनाया गया.


 


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