गोवंश संरक्षण के इंतजाम, लापरवाही, देखरेख व चारे के अभाव में दम तोड़ रहीं गायें

   


   


प्रदेश में गोवंश संरक्षण के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली इस योजना को पलीता लगाने में अफसर कसर नहीं छोड़ रहे। कोई दिन नहीं बीतता जब लापरवाही, देखरेख और चारे के अभाव में गायें दम न तोड़ रही हों। 


 

अभी प्रयागराज में 35 से ज्यादा गायों के मरने का मामला ठंडा नहीं पड़ा था कि अयोध्या जिले की दो गोशालाओं में 30 गोवंश की मौत हो गई। अवध में कई स्थानों पर अभी तक गोवंश आश्रय स्थल नहीं बन पाए हैं। वहीं, कुछ गोवंश आश्रय स्थल बाढ़ के दौरान टापू में तब्दील हो गए हैं। 

बारिश में गायों को खुले आसमान के नीचे छोड़ दिया गया है। कई गोशालाओं के निर्माण के नाम पर सिर्फ चारदीवारी की गई है। कई जगह सिर्फ  टिन शेड डाल दिया गया है। कई गोशालाओं में गायें कीचड़ में फंसकर दम तोड़ रही हैं। गोवंश की बदहाली से अधिकारियों ने एक तरह से मुंह मोड़ रखा है। यही वजह है कि अलग-अलग गोशालाओं में गायों की छिटपुट मौत का सिलसिला हर रोज चल रहा है। 



 


गोवंश संरक्षण योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। निराश्रित गोवंश की समस्या से निजात के लिए राज्य सरकार प्रत्येक जिले में गोवंश आश्रय स्थल बनवा रही है। इसके लिए धन आवंटन किया जा चुका है, लेकिन जिलों से मिल रही सूचनाओं के मुताबिक इनके निर्माण की रफ्तार धीमी है। आधी-अधूरी गोशालाओं व आश्रय स्थलों में निराश्रित पशुओं को रखा गया है।

तमाम स्थानों पर टिन शेड तक नहीं है। अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। बरसात के मौसम में गोवंश का हाल बुरा है। कहीं वे रात भर बारिश से भीग रहे हैं तो कहीं बाढ़ के बीच फंसे हैं। अयोध्या जिले में मिल्कीपुर के पलिया माफी व पूरा बाजार के बैसिंह में करीब 30 गोवंश की मौत हो गई है, जबकि इतने ही बीमार हैं।

बारिश के चलते इन गोशालाओं में चारों तरफ कीचड़ जमा हो गया है। दलदल युक्त कीचड़ में फंसकर गोवंश निकल नहीं पा रहे हैं, वे कीचड़ में ही दम तोड़ रहे हैं। बीमार गोवंश कौवों के झुंड के हमलों से बुरी तरह घायल हो रहे हैं। अधिकारी पिछले चार दिनों से हो रही बारिश को गायों की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। 

मुख्यमंत्री के निर्देश पर छुट्टा घूम रहे गोवंशों को आश्रय देने के लिए जिले में 29 गोशालाओं का निर्माण होना था। वर्तमान में 15 गोशालाएं चल रही हैं जबकि 14 निर्माणाधीन हैं। इन 15 गोशालाओं में सिर्फ पूरा ब्लॉक के गांव बैसिंह में बनी गोशाला नगर निगम के अधीन है।

इसके रखरखाव व चारे की व्यवस्था निगम के जिम्मे है। शेष गोशालाएं ग्राम प्रधान व ब्लॉक अधिकारियों की देखरेख में संचालित हो रही हैं। वहां जानवरों की देखभाल व चारे की व्यवस्था का जिम्मा उन्हीं पर है। हाल ये है कि एक-एक गोशालाओं में 300 से 500 गोवंश हैं। ये क्षमता के काफी ज्यादा है।  



बलरामपुर में 8.28 करोड़ मिलने के बाद भी सिर्फ 4 आश्रय स्थल बने


बलरामपुर में कुल 113 गोवंश आश्रय स्थलों का निर्माण प्रस्तावित है। इनमें से 101 जिले की सभी न्याय पंचायतों में, चार नगरों तथा आठ गोवंश आश्रय स्थल भारत-नेपाल सीमा पर बनाए जाने हैं। इनके लिए राज्य सरकार ने आठ करोड़ 28 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट भी दिया है। इसके बावजूद केवल चारों नगरों में ही अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल संचालित हो रहे हैं।

तुलसीपुर स्थित गोवंश आश्रय स्थल में पिछले महीनों में 6 गायों की मौत हो चुकी है। न्याय पंचायतों तथा भारत-नेपाल सीमा पर बनने वाले गोवंश आश्रय स्थलों का निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हो सका है। उतरौला नगर में बना गोवंश आश्रय स्थल बाढ़ के दौरान टापू में तब्दील है। यहां रखी गई गायों को बारिश के चलते छोड़ दिया गया है। बलरामपुर नगर पालिका द्वारा सिरिया फार्म में बने अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल में गायों के लिए चारे-पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।



रायबरेली में हो चुकी 24 गोवंश की मौत  


रायबरेली में एक सप्ताह पहले राही ब्लॉक की लोधवारी स्थित गोशाला में 12 गोवंश की मौत हुई थी। वहीं लखनऊ-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित शहर के त्रिपुला के पास कान्हा गोशाला में ढाई महीने पहले देखरेख में लापरवाही और भोजन के अभाव में 12 मवेशियों की मौत हो चुकी है। जिले में मौजूदा समय में 12 गोशालाएं संचालित हैं।

मेंरूई ग्रामसभा के खीरों में एक करोड़ 20 लाख की लागत से वृहद गोशाला केंद्र का निर्माण किया गया है। राही ब्लॉक क्षेत्र के बेलाखारा में जमीन अधिगृहीत कर ली गई है। मवेशियों के भरण-पोषण के लिए एक करोड़ पांच लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। जिले में 2321 मवेशियों की देखभाल की जिम्मेदारी जिला पंचायत व पशुपालन विभाग की है।

बावजूद इसके गोवंश की मौतें हो रही हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. गजेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि जिले को तीन करोड़ 45 लाख रुपये का बजट मिला है। मवेशियों के भरण-पोषण पर अब तक 62 लाख खर्च किए जा चुके हैं। 


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