12वीं सदी का इतिहास दोहराने की कगार पर देश!






अपनी कुछ गलतियों से अनजान महाप्रतापी महावीर पृथ्वीराज चौहान अति उत्साह में मुहम्मद गोरी से दूसरी लड़ाई लड़ने चल दिए, अति आत्मविश्वास हो गया था, क्योंकि पहली लड़ाई में उन्होंने गोरी को बुरी परास्त किया था.

उस समय सत्ता के तीन केन्द्र थे दिल्ली, कन्नौज और गुजरात.

दिल्ली का राजा चौहान लड़ रहा था, कन्नौज का राजा गद्दारी कर रहा था और गुजरात का राजा तटस्थ बैठा था

नतीजा यह हुआ कि चौहान की हार हुई, गोरी के सैनिकों ने घेर कर मार दिया!

और देश सैकड़ों साल तक गुलाम हो गया, फिर किसी खालिस देशी राष्ट्रवादी व्यक्ति या ताकत के हाथ देश का शासन 

न आ सका.

काश कि चौहान ने गोरी को पहले ही युद्ध में खत्म कर दिया होता!

काश कि चौहान ने जयचंद को गद्दारी के लायक छोड़ा ही न होता!

काश कि भीमदेव सोलंकी की नाराजगी को दूर कर उन्हें अपने साथ लिया होता!

 

मोदी और 2019 चुनाव,

कहीं वही इतिहास तो नहीं लौटने वाला!

 

पहली लड़ाई 2014 अपने दम पर जीत ली थी मोदी जी ने, फिर भूल गए गोरियों को, सतर्क न हुए जयचदों से, और जरूरत न समझी सोलंकियों की, आप तो लगता है संत हो गये!

तराइन का दूसरा युद्ध सामने है मोदी जी, आप लोहा लेने चल भी पड़े हैं, 

उम्मीद है आपने इतिहास से सीख ली होगी, और आप उसे दोहराने नहीं देंगे!

 


 

 



 



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