लखनऊ का दूसरा छोटा ब्लाक काकोरी, इस पंचायत गठन के एक साल बाद!
लखनऊ: जिले का नंबर दो छोटा ब्लाक काकोरी पंचायत चुनावों के एक साल बाद विकास कार्यों को लेकर बड़े संघर्षमय स्थिति में रहा है। कुछ ग्राम पंचायतों में औसत विकास कार्य चलते रहे हैं, तो कहीं कुछ ज्यादा काम हुए ही नहीं हैं। हालांकि एकाध ऐसी पंचायतें भी यहां हैं जहां ग्राम प्रधान और उनके प्रतिनिधियों के प्रयास से अन्य पंचायतों के मुकाबले ज्यादा काम हुए हैं। 
प्रस्तुत है कुछ पंचायतों की मौजूदा स्थिति :- 

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मुजफ्फरनगर पलिया के प्रधान आनंद यादव ने एक साल में कई काम करवाए हैं, पंचायत घर, सामुदायिक शौचालय, स्कूल के साथ सरकारी भवनों के सुधार करवाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार समय पर गौशाला का पेमेंट करती रहे तो प्रधानों को आसानी होगी। साथ ही प्रति जानवर खर्च की तय राशि बढ़नी चाहिए।

सराय अलीपुर की प्रधान रामदुलारी अपनी पंचायत में एक साल में कोई विशेष कार्य नहीं करा पाई हैं। कारण यह कि वे एक सीधी सादी महिला हैं इसी कारण वे अपनी बात स्पष्ट रूप से नहीं रख पा रही हैं, पति लालता प्रसाद की मृत्यु के बाद उनका सहयोग करने वाला कोई नही है। उनकी मांग है कि सचिव, लेखपाल, रोजगार सेवक, सफाई कर्मी आदि के साथ वरिष्ठ अधिकारीयों को भी पंचायत में ध्यान देना चाहिए, सराय अलीपुर में बहुत कार्य होने बाकी हैं, लोगों को आवास की जरूरत है, खुद प्रधान रामदुलारी परिवार सहित कच्चे घर में रहती हैं। उन्हें भी पी एम आवास की जरूरत है।

बसरैला के प्रधान अवनीश कुमार ने पंचायत भवन, सामुदायिक शौचालय का मरम्मत करवाया है। अवनीश कुमार ने बताया कि पंचायत में करीब 150 पात्रों  ्क्को आवास नहीं मिला है। और पंचायत में नरेगा से काम नहीं कराये जा सकता हैं।्क्योंकि पंचायत रकबे में चकमार्ग , तालाब , रास्ते आदि दर्ज ही नही हैं। इसके अलावा उपस्वास्थ्य केंद्र, बारात घर, शमशान घाट, आंगनबाड़ी आदि नहीं है।

थावर की प्रधान माधुरी सिंह ने बताया कि उन्होंने महिला सहायता समूह का उद्यमिता केंद्र बनवाया है। माधुरी सिंह के पति, प्रतिनिधि व पूर्व प्रधान अतुल कुमार सिंह ने बताया कि सरकारी भवनों की मरम्मत के साथ कई जन कल्याणकारी काम किए जा रहे हैं। पंचायत में शमशान घाट नंही है जिसका प्रयास किया जा रहा है। अतुल कुमार सिंह ने कहा कि सरकार को चाहिए कि सफाई कर्मियों की पूरी जिम्मेदारी और उनके पारश्रमिक की व्यवस्था पंचायत के जरिए करवाए, ताकि सफाई कर्मी मनमानी न कर सकें व ग्राम प्रधान उनसे ठीक तरह से सफाई के काम ले सकें।

भलिया की प्रधान छाया सिंह और उनके प्रतिनिधि पति ने एक साल में भलिया का नक्शा बदल दिया है। आंगनबाड़ी नया बनवाने के साथ, स्कूल में शौचालय निर्माण, 200 मीटर के करीब आरसीसी रोड ्ढ़्मटर नालियों आदि का निर्माण करवाया है।

सकरा की प्रधान राजकुमारी मौर्या ने अपनी पंचायत में एक साल में करीब 1200 मीटर इंटरलांकिग करवाई है, करीब 60 नल रिपेयर करवाए और करीब 6 नल रिबोर करवाए हैं। उनके पति व प्रतिनिधि दिलीप कुमार मौर्या ने बताया कि पंचायत भवन पूरी तरह जर्जर है, करीब 50 साल पुराना है, उसे गिराकर नया पंचायत भवन बनाया जाना है लेकिन कई जगह शिकायत व मांग की गई पर कोई सुनवाई नहीं हुई।

फतेहमंज के प्रधान यदुनाथ ने एक साल में पंचायत की सूरत बदलने का भरपूर प्रयास किया है। हर जगह अंडरग्राउंड नालियां बन रही है, करीब 200 मीटर आरसीसी गलियों का निर्माण हो चुका है। ह्यूम पाइप डालकर बड़ा नाला बनवाया है। और अंडरग्राउंड नालियां बनवाई हैं। पंचायत घर पर संचार विभाग का कब्जा है, खाली कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। पानी की टंकी बन रही थी लेकिन एक दो लोगों ने उस काम में रोक लगवा दी है।

इब्राहिमगंज के वकील प्रधान ने बताया कि 26 पंचायतों में बनते पंचायत भवनों में सबसे पहला पंचायत भवन बनवाने वाली पहली पंचायत इब्राहिमगंज बनी हैं। उनके प्रयासों को राज्य व केन्द्र सरकार द्वारा भी सराहा गया है। इसके साथ वे सुरक्षित जमीनों घेराबंदी कर उसे सुरक्षित करना चाहते हैं।

बरकताबाद की प्रधान सीमा देवी और उनके प्रतिनिधि सुरेन्द्र ने पुराने पंचायत घर का पूरा प्लास्टर निकलवा कर फिर से मरम्मत करवाया है। शमशान घाट में तारों से बैरीकेटिंग कर वृक्षारोपण करवा कर सौंदर्यीकरण करवाया है।

सरसण्डा के प्रधान पुत्तीलाल ने बताया कि पंचायत घर सड़क से काफी नीचा था उसे ऊंचा करवाया गया है। उनके प्रतिनिधि गयाप्रसाद ने बताया कि नया बना सामुदायिक शौचालय क्षतिग्रस्त हो गया है। किसी काम का नही बनवाया गया है। अन्य कामों के प्रयास किए जा रहे हैं।

कठिंगरा की प्रधान विद्या और उनके प्रतिनिधि पुत्र रामशंकर उर्फ कल्लू ने बताया कि एक साल में कई काम हुए लेकिन सामुदायिक शौचालय को असमाजिक तत्वों ने तोड़ दिया है। 

कसुमी के युवा प्रधान सुमित कनौजिया ने एक साल में सिर्फ एक आंगनबाड़ी का निर्माण करवाया। उनका कहना है कि बाकी कोई कार्य सिर्फ इसलिए नहीं हो पा रहे, या कोई नाली खड़ंजा आदि नहीं बन पा रहा है क्योंकि सरकार से पैसे नहीं मिल पा रहे हैं।

कूड़ा ईंटगांव की प्रधान रामलली ने महिला समूह शेड बनवाया है जो ग्रामीण महिलाओं को कारोबार में मददगार है। प्रधान पति व प्रतिनिधि रामचंद्र ने बताया कि सफाई पर विशेष ध्यान है, अपने निजी लेबर लगवाकर सफाई करवाते हैं। इसके साथ नल रिबोर, तीन आरसीसी रोड, वाटर हार्वेस्टिंग, के साथ पंचायत भवन व आंगनबाड़ी केंद्र का मरम्मत करवाया है।

खुशहालगंज प्रधान नबी हसन ने एक साल में पंचायत भवन, आंगनबाड़ी भवन का मरम्मत करवाया है। खड़ंजे नाली आदि के साथ आरसीसी रोड आदि बनवाया है। नबी हसन की यह विशेषता है कि किसी भी व्यक्ति का निवास प्रमाण लिखने से पहले वे उसके बारे में पूरी तसल्ली कर लेते हैं। जरा भी शक हो तो वे उसे चेतावनी देकर भगा देते हैं।

टेड़वा के मनीष कुमार अपनी पंचायत में दबंगो द्वारा अवैध कब्जे और निर्माण से परेशान हैं और उसे मुक्त करवाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कुशभरी के प्रधान जगदीश कुमार ने बताया कि स्कूल की बाउंड्री ध्वस्त है। प्रयास किया जा रहा है बाकी के काम भी करवाए जा रहे हैं।

सैदपुर महेरी के प्रधान मिट्टृलाल ने पंचायत भवन मरम्मत करवाया है, समूह शेड बनवाया है। करीब 400 मीटर आरसीसी रोड का निर्माण करवाया है, एक - दो सफाई कर्मी अनियमित हैं।

कुशमौरा हलवापुर के सामुदायिक शौचालय पर गांव के एक दबंग का कब्जा है। जलियामऊ में एक साल में कई काम हुए हैं, बहरू में कुछ खास काम नहीं हुए। अमेठिया सलेमपुर की प्रधान ममता रावत महिला सशक्तिकरण की मिसाल हैं खुद ही सारे काम देखती हैं। पुरैना की प्रधान सुनीता कनौजिया ने, अतिरिक्त टाउन एरिया के ज्योति प्रकाश ने , काकराबाद की प्रधान गरिमा सिंह भी कई उल्लेखनीय काम करवाए हैं। सिरगामऊ के प्रधान ने भी एक साल में कई कार्य करवाए हैं। भटऊ जमालपुर के प्रधान रमेशचंद्र पेमेंट न मिलने से विकास नही करवा पा रहे हैैं, गौशाला में पशुओं को चारा नहीं मिल पा रहा है। दसदोई के प्रधान राजकुमार ने कुछ अच्छे कार्य करवाए हैं।

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