भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ जिला मुख्यालयों पर किया प्रदर्शन

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं ने राफेल मुद्दे पर दायर पुनर्विचार याचिकाओं को उच्चतम न्यायालय द्वारा खारिज किये जाने के बाद आज देश भर के सभी जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया और पार्टी के नेता राहुल गाँधी से उनके 'झूठ' के लिए माफीनामे की मांग की। पार्टी ने राफेल पर कांग्रेस के कथित झूठ के खिलाफ देश के हर जिले में धरना-प्रदर्शन की शुरुआत कल ही दिल्ली से शुरू की थी। आज देश भर में भाजपा के लाखों कार्यकर्ताओं ने व्यापक प्रदर्शन किया और गाँधी से  देश से 'झूठ' बोलने के लिए औपचारिक रूप से क्षमायाचना करने की मांग की। पार्टी के महासचिव अरुण सिंह ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में सैकड़ों पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस के खिलाफ हल्ला बोला तो महाराष्ट्र में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभाला।

 

पटना में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल ने धरना-प्रदर्शन में भाग लेकर कांग्रेस की पोल खोली तो लखनऊ में अवध क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष और विधायक सुरेश तिवारी, विधायक सुरेश श्रीवास्तव और महानगर एवं जिला अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विशाल प्रदर्शन किया। जयपुर में बड़ी  संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ धरना दिया और गाँधी से माफी मांगने को कहा। शिमला, चंडीगढ़, वाराणसी से लेकर कोलकाता, भोपाल और तिरुवनंतपुरम तक भारी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ धरना दिया और गाँधी से माफी मांगने को कहा। दिल्ली में कल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी और वरिष्ठ भाजपा नेता विजय गोयल ने कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था। गाँधी से माफी की मांग करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि देश के लिए यह दुर्भाग्य की बात है कि कांग्रेस और गाँधी ने लगातार झूठ बोलते हुए देश के लोकप्रिय एवं ईमानदार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि को धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किया और विश्व पटल पर भारत को बदनाम करने की शर्मनाक कोशिश की लेकिन उच्चतम अदालत का फैसला आने के बाद कांग्रेस एक बार फिर बेनकाब हो गयी है।

 

गत 14 नवंबर को सर्वोच्च अदालत ने राफेल मुद्दे पर दायर सभी पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया। इससे पहले दिसंबर 2018 में भी उच्चतम न्यायालय ने राफेल सौदे को सही ठहराया था। तब न्यायालय ने सौदे की निर्णय प्रक्रिया, कीमत और ऑफसेट पार्टनर के चुनाव की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की थी और स्पष्ट कहा था कि इस सौदे में कोई अनियमितता नहीं हुई है।