अमेरिका दौरे पर न्यू इंडिया की ताकत से दुनिया को रूबरू करा आये हैं मोदी

तारीफ करनी होगी हमारे प्रधानमंत्री की, हमारे विदेश मंत्री की, हमारे अधिकारियों की, जिन्होंने व्यापार, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, नई वैश्विक चुनौतियों आदि पर तो दुनिया के समक्ष देश का पक्ष तो प्रभावी तरीके से रखा ही साथ ही उभरते भारत की शक्ति से दुनिया को रूबरू कराया।



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह अमेरिका दौरा जबरदस्त रूप से सफल रहा। ह्यूस्टन के एनआरजी स्टेडियम से भारत की सफलता का जो डंका बजना शुरू हुआ था वह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिये ऐतिहासिक भाषण तक जारी रहा। संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक महाधिवेशन में शामिल तो लगभग 200 के आसपास देश हुए लेकिन सबसे ज्यादा अगर कोई देश चर्चा में रहा तो वह भारत था। तारीफ करनी होगी हमारे प्रधानमंत्री की, हमारे विदेश मंत्री की, हमारे अधिकारियों की, जिन्होंने व्यापार, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, नई वैश्विक चुनौतियों आदि पर तो दुनिया के समक्ष देश का पक्ष तो प्रभावी तरीके से रखा ही साथ ही उभरते भारत की शक्ति से दुनिया को रूबरू कराया।


प्रधानमंत्री मोदी ने ह्यूस्टन की रैली और संयुक्त राष्ट्र के अपने संबोधन में पाकिस्तान की धज्जियाँ उड़ा दीं। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किये जाने के बारे में पाकिस्तान की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए उसके चेहरे पर से नकाब हटाने में, पाकिस्तान को दुनिया भर में अलग-थलग करने में प्रधानमंत्री बेहद सफल रहे। यही कारण है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पूरी अमेरिका यात्रा के दौरान निराश नजर आये, कहीं से कोई मदद नहीं मिली, किसी देश ने उनका पुराना रोना नहीं सुना। क्या आपने इससे पहले कभी सुना है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण से पहले ही कह दिया हो कि इससे कुछ फायदा होने वाला नहीं है। क्या आपने इससे पहले कभी सुना है कि पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र के किसी फोरम पर किसी प्रस्ताव को लाने के लिए न्यूनतम समर्थन भी नहीं मिला हो। क्या आपने कभी सुना है कि किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत के प्रधानमंत्री के साथ कोई संयुक्त सभा की हो और उस जनसभा में 50 हजार से ज्यादा लोग जुटे हों, क्या आपने कभी सुना है कि किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत के प्रधानमंत्री को फादर ऑफ इंडिया और रॉक स्टार एल्विस प्रिस्ले बताया हो, क्या आपने कभी इससे पहले सुना है कि किसी भारतीय प्रधानमंत्री के भाषण को सुनने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के आ गये हों और पूरा भाषण सुना हो। इतिहास गवाह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने पाकिस्तान की इतनी धज्जियाँ कोई नहीं उड़ा पाया जितना मोदी ने अपनी ह्यूस्टन रैली में कर दिखाया था। 


प्रधानमंत्री मोदी का अमेरिका दौरा इस मायने में भी सफल रहा कि अब भारत की पहचान ऐसे देश की बन गयी है जिसकी राय अंतरराष्ट्रीय मामलों में बड़ी शक्तियों के लिए अहमियत रखती है, अब भारत की पहचान ऐसे देश की बन गयी है जिससे दुनिया के छोटे-बड़े देश आर्थिक और तकनीकी मदद की आस रख सकते हैं, अब भारत की पहचान ऐसे देश की बन गयी है जिसकी सफलता की कहानी हर कोई जानना चाहता है। अब भारत की पहचान ऐसे देश की बन गयी है जिसे कोई नाराज नहीं करना चाहता। अपनी इस यात्रा के दौरान भारत की सामाजिक योजनाओं की सफलता, तेजी से मजबूत होती अर्थव्यवस्था की जो तसवीर प्रधानमंत्री ने दुनिया को दिखायी है, यकीनन उससे भारत में निवेश बढ़ सकता है।

 

प्रधानमंत्री के अमेरिका दौरे पर जरा सरसरी नजर डालें तो कुछ प्रमुख बातें उभर कर आती हैं। 

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 74वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र से इतर 'आतंकवाद और हिंसक कट्टरपंथी विमर्श पर रणनीतिक प्रतिक्रिया से संबंधित नेतृत्व वार्ता' में अपने संबोधन में बहुपक्षीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को संस्थागत रूप देने का आह्वान किया और जोर देकर कहा कि इस दिशा में भारत मित्र देशों के क्षमता निर्माण और पहले से जारी सहयोग को बढ़ाने की खातिर काम करेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दुनिया में कहीं भी होने वाले आतंकवादी हमले को 'बड़ा या छोटा' या 'अच्छा या बुरा' नहीं बल्कि 'आतंकवादी कार्रवाई' ही माना जाना चाहिए। बैठक में आतंकवाद तथा हिंसक कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाली ऑनलाइन उपलब्ध सामग्री को खत्म करने के लिए 'क्राइस्टचर्च कॉल टू एक्शन' के बारे में भी चर्चा हुई। भारत ने भी आतंकवाद, घृणा और हिंसा को बढ़ावा देने वाली सामग्री से साइबर स्पेस को मुक्त करने से जुड़े 'क्राइस्ट चर्च कॉल' का समर्थन किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने क्राइस्ट चर्च कॉल का समर्थन करने पर भारत की प्रशंसा की और कहा कि भारत के समर्थन से यह संपूर्ण पहल एक नए स्तर पर पहुंच गई है।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वस्थ जीवन पर हर व्यक्ति के अधिकार पर जोर देते हुए कहा कि किफायती स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं मुहैया कराने में भारत का अनुभव और क्षमताएं सभी विकासशील देशों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध है। 'सार्वभौम स्वास्थ्य देखभाल' पर आयोजित अब तक की पहली उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, ''स्वास्थ्य का मतलब केवल रोगों से मुक्त होना नहीं है। स्वस्थ्य जीवन पर सभी लोगों का अधिकार है।'' उन्होंने कहा, 'आयुर्वेद, योग और टेली मेडिसिन के रास्ते भारत अनेक देशों, खासकर अफ्रीकी देशों की किफायती स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच बढ़ा रहा है और हम ऐसा करते रहेंगे। हमारा अनुभव और हमारी क्षमताएं सभी विकासशील देशों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हैं।'' उन्होंने कहा कि भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र की दिशा में कई तरह के कदम उठाए हैं और इसके चार प्रमुख स्तम्भों-एहतियाती स्वास्थ्य, किफायती स्वास्थ्य देखभाल, आपूर्ति पक्ष में हस्तक्षेप और हस्तक्षेप को मिशन आधार पर चलाने-पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के एहतियाती स्वास्थ्य देखरेख कार्यक्रम का एक और आयाम 1,25,000 से अधिक वेलनेस सेंटर खोलने का है तथा देश टीकाकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

 

व्यापार और निवेश

 

भारतीय कंपनी पेट्रोनेट ने 2.5 अरब डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए और इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में इससे 60 अरब डॉलर का व्यापार होगा और 50,000 नौकरियां पैदा होंगी जो भारत द्वारा की गई एक बड़ी पहल है।

 

प्रधानमंत्री ने वैश्विक कंपनियों के प्रमुखों तथा अमेरिका के शीर्ष उद्यमियों से दुनिया के समक्ष खड़ी कुपोषण और कचरा प्रबंधन जैसी ज्वलंत समस्याओं के समाधान के लिये स्टार्टअप इंडिया नवोन्मेषी प्लेटफार्म का लाभ उठाने की अपील भी की। उन्होंने 20 क्षेत्रों के 42 वैश्विक मुख्य कार्यकारियों (सीईओ) के साथ एक विशेष गोलमेज चर्चा की अध्यक्षता करते हुए यह अपील की। उन्होंने देश में राजनीतिक स्थिरता, सुनिश्चित नीतियों तथा विकास एवं वृद्धि के अनुकूल नीतियों का जिक्र किया। उन्होंने पर्यटन के विकास, प्लास्टिक पुनर्चक्रीकरण और कचरा प्रबंधन पर जोर दिया। उन्होंने एमएसएमई का कारोबार बढ़ाने तथा किसानों एवं कृषि के लिये अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने सीईओ के साथ न्यूयॉर्क में हुई गोलमेज चर्चा में देश को पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिये उठाये गये कदमों का जिक्र किया। वैश्विक कारोबारी समुदाय भारत की सफलता की कहानी को लेकर उत्साहित दिखा। वैश्विक सीईओ ने कारोबार को सुगम बनाने और कई अन्य सुधारों की दिशा में भारत द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इनके कारण निवेशकों के अनुकूल माहौल बना है। इस कार्यक्रम में आईबीएम की अध्यक्ष एवं सीईओ गिन्नी रोमेटी, वालमॉर्ट के अध्यक्ष एवं सीईओ डगलस मैकमिलन, कोका कोला के चेयरमैन एवं सीईओ जेम्स क्विनसी, लॉकहीड मॉर्टिन की सीईओ मॉर्लिन ह्यूसन, जेपी मोर्गन के चेयरमैन एवं सीईओ जेमी डिमोन, अमेरिकन टॉवर कार्पोरेशन के सीईओ एवं भारत-अमेरिका सीईओ मंच के उपाध्यक्ष जेम्स डी. टेसलेट और एप्पल, गूगल, वीसा, मास्टरकार्ड, 3एम, वारबर्ग पिनकस, एईसीओएम, रेथियोन, बैंक ऑफ अमेरिका, पेप्सी जैसी कंपनियों के वरिष्ठ कार्यकारी शामिल हुए।

 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के उनके समकक्ष चार्ल्स मिशेल द्विपक्षीय निवेश और व्यापार समझौते पर बातचीत में शीघ्र निष्कर्ष पर पहुंचने और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, बहुपक्षीय संस्थानों, प्रवास और गतिशीलता पर करीबी सहयोग बढ़ाने की अपनी कोशिशों को तेज करने पर सहमत हुए। मोदी ने यूरोपीय परिषद का अध्यक्ष चुने जाने पर मिशेल को बधाई भी दी। दोनों नेता इस पर भी सहमत हुए कि 15वां भारत-यूरोपीय संघ सम्मेलन जल्द ही आयोजित होना चाहिए।


प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया भर की कंपनियों को भारत में निवेश के लिये आमंत्रित करते हुये कहा कि उनकी सरकार ने कॉरपोरेट कर की दर में कटौती करके उनके लिये सुनहरा अवसर सृजित किया है। उन्होंने देश में कारोबारी माहौल को सुधारने के लिए और उपाय करने का भी वादा किया। मोदी ने ब्लूमबर्ग ग्लोबल बिजनेस फोरम को संबांधित करते हुये कहा कि भारत ने देश में निवेश के लिए सुनहरे अवसर की पेशकश की है। प्रधानमंत्री ने दुनिया को बताया कि भारत तेजी से अपने शहरों का आधुनिकीकरण कर रहा है और उन्हें नवीन तकनीकी और नागरिक अनुकूल आधारभूत संरचना से लैस कर रहा है।



 

ऋण की घोषणा

 

प्रधानमंत्री ने कैरेबियाई देशों के एक समूह के लिये सामुदायिक विकास की परियोजनाओं में 1.40 करोड़ डॉलर की मदद की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने सौर ऊर्जा, अक्षय ऊर्जा और पर्यावरण संबंधी कार्यों के लिये 15 करोड़ डॉलर की ऋण सुविधा देने का भी ऐलान किया। प्रधानमंत्री ने पहले भारत-कैरेबियाई समुदाय (कैरिकॉम) शिखर सम्मेलन में ये घोषणाएं कीं। इससे कैरेबियाई देशों के साथ भारत के ऐतिहासिक तथा गर्मजोशी भरे संबंधों को नयी ऊंचाई मिली है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र से इतर हुए इस कार्यक्रम में सेंट लुसिया के प्रधानमंत्री एवं कैरिकॉम के मौजूदा अध्यक्ष एलेन चेस्टनेट ने सह-अध्यक्षता की। कैरिकॉम में 15 सदस्य देश हैं तथा पांच सहयोगी देश हैं। बैठक में एंटीगुआ एवं बरबुडा, बहामास, बारबाडोस, बेलिज, डोमिनिका, ग्रेनाडा, गुयाना, हैती, जमैका, सेंट किट्स एवं नेविस, सेंट लुसिया, सेंट विंसेंट एवं ग्रेनाडाइन्स, सूरीनाम तथा त्रिनिडाड एवं टौबैगो के शीर्ष नेतृत्व एवं प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।


इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' के मूल मंत्र के तहत प्रशांत द्वीपसमूह के देशों को सौर, नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु संबंधी परियोजनाओं के लिए उनकी जरूरत के आधार पर 15 करोड़ डॉलर की ऋण सहायता का ऐलान भी किया। भारत-प्रशांत द्वीपसमूह के विकासशील देशों के नेताओं के साथ बैठक में मोदी ने PSIDS के सदस्य देशों को विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए कुल एक करोड़ 20 लाख डॉलर आवंटित किए जाने की भी घोषणा की। यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री ने PSIDS के नेताओं से बहुपक्षीय मुलाकात की है। इस बैठक में फिजी, किरिबाती गणराज्य, मार्शल आइलैंड, फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया, नोरू गणराज्य, पलाऊ गणराज्य, पापुआ न्यू गिनी, समोआ, सोलोमन आइलैंड, टोंगा, तुवालु और वनुआतु के प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने भाग लिया। 



 

परमाणु ऊर्जा

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह का सदस्य न बनाए जाने से परमाणु ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए ईंधन की आवश्यक आपूर्ति बाधित हो रही है और अगर यह समस्या हल कर ली जाती है तो देश बाकी विश्व के लिए आदर्श बन सकता है। मोदी ने कहा कि एक चुनौती जो अब भी हमारे सामने मुंह बाए खड़ी है वह परमाणु ऊर्जा है। उन्होंने ब्लूमबर्ग ग्लोबल बिजनेस फोरम में सवाल और जवाब के सत्र के दौरान कहा, ''हम परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह के सदस्य नहीं हैं और इसके कारण हमें परमाणु ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए ईंधन की आवश्यक आपूर्ति नहीं मिलती है।'' गौरतलब है कि चीन ने 48 सदस्यीय इस समूह में भारत की सदस्यता के रास्ते में हमेशा रोड़े अटकाए हैं। मई 2016 में एनएसजी की सदस्यता के लिए भारत द्वारा आवेदन देने के बाद से ही चीन इस पर जोर देता रहा है कि केवल वे देश ही इस संगठन का हिस्सा बन सकते हैं जिन्होंने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर कर रखे हैं। भारत ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हुए।

 

स्वच्छ ऊर्जा

 

प्रधानमंत्री ने दुनिया को बड़े स्पष्ट तरीके से बताया है कि उनकी सरकार कोयले से गैस बनाने (गैसीफिकेशन) के तौर-तरीकों और प्रौद्योगिकी पर विचार कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश अपने प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग पर्यावरण अनुकूल तरीकों से कर सके। उन्होंने कहा, "यह सही है कि दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कोयला भंडार भारत में है। भारत जैसे गरीब देश में, हम इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं लेकिन इसके लिए समाधान ढूंढा जा सकता है।"

 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिहाज से आदतों में बदलाव लाने के लिए एक वैश्विक जन आंदोलन की जरूरत बताई और भारत के गैर-परंपरागत (नॉन फॉसिल) ईंधन उत्पादन के लक्ष्य को दोगुने से अधिक बढ़ाकर 450 गीगावाट तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया। मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस द्वारा आयोजित सम्मेलन में वैश्विक नेताओं को संबोधित करते हुए कहा, ''हमें स्वीकार करना चाहिए कि अगर हमें जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौती से पार पाना है तो हम इस समय जो कुछ कर रहे हैं, वह पर्याप्त नहीं है।'' उन्होंने कहा, ''भारत में हमने अपने परिवहन क्षेत्र को हरित बनाने की योजनाएं बनाई हैं। भारत पेट्रोल और डीजल में मिलाने के लिए जैवईंधन का अनुपात बढ़ाने पर भी काम कर रहा है।'' भारत ने संयुक्त राष्ट्र भवन की छत पर सौर पैनलों का उद्घाटन भी किया जो 10 लाख डॉलर की लागत से बनाये गये हैं। मोदी ने इस दौरान बताया कि भारत की पहल पर शुरू हुए अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में अब तक 80 देश शामिल हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने अंतरारष्ट्रीय सौर गठबंधन में मोदी के नेतृत्व की तारीफ की और भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र को दिए गए 193 सौर पैनल को 'बेहद उपयोगी' करार दिया।

 

आपदा रोधी बुनियादी ढांचा

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत द्वारा शुरू किये जा रहे आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन में शामिल होने की खातिर संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को आमंत्रित करते हुए उच्चस्तरीय संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए भारत के व्यवहारिक रूख और रूपरेखा भी पेश की।

 


द्विपक्षीय वार्ताएं और उपलब्धियाँ

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी के साथ गहन वार्ता के दौरान फारस की खाड़ी में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के लिए कूटनीति, वार्ता एवं भरोसा कायम किए जाने को प्राथमिकता देने के प्रति भारत का सहयोग दोहराया। मोदी और रुहानी ने ईरान और अमेरिका के बीच ताजा तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र के इतर मुलाकात की। तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर ईरान और अमेरिका में तनाव की स्थिति के बीच भारत और ईरान की इस बैठक का उत्सुकता से इंतजार किया जा रहा था। अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ईरान पर सऊदी अरब में दो तेल संयंत्रों पर हमला करने का भी आरोप लगाया है जिसके कारण क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। दोनों नेताओं ने इस बात का उल्लेख किया कि भारत और ईरान के साझे प्राचीन एवं सांस्कृतिक संबंध हैं। उन्होंने 2015 में रूस के ऊफा शहर में उनकी पहली बैठक के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति का आकलन किया। मोदी और रुहानी ने चाबहार बंदरगाह के महत्व पर भी बात की और अफगानिस्तान एवं मध्य एशियाई क्षेत्र में आवागमन के द्वार के तौर पर इसकी महत्ता को रेखांकित किया। बैठक के दौरान 2020 में राजनयिक संबंध स्थापित होने की 70वीं वर्षगांठ मनाने पर सहमति जताई गई।

 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड की उनकी समकक्ष जेसिंडा आर्डर्न ने मुलाकात कर आतंकवाद से लड़ाई में एक दूसरे का समर्थन करते हुए पुलवामा तथा क्राइस्टचर्च आतंकी हमलों की कड़ी निंदा की। मोदी और आर्डर्न ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करते हुए राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, सुरक्षा तथा जनता के बीच संबंधों को मजबूत करने के कदमों पर चर्चा की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के मुद्दे समेत आपसी हित के वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की तथा इस विषय पर दोनों देशों के विचार मिलने की सराहना की।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्मेनिया के अपने समकक्ष निकोल पाश्नियान और के साथ बैठक के अलावा भी कई द्विपक्षीय बैठकें कीं। मोदी ने अर्मेनिया के प्रधानमंत्री के साथ बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने अर्मेनिया में सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में अवसर तलाशने की भारतीय कंपनियों की इच्छा को भी जाहिर किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरेशिया आर्थिक संघ (ईएईयू) के बीच व्यापार मजबूत करने के लिए अर्मेनिया का सहयोग मांगा। अर्मेनिया इस संघ का सदस्य है। भारत और ईएईयू शीघ्र ही इस पर वार्ता करने जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाए जाने पर भारत को सदस्यता देने के अर्मेनिया के समर्थन पर मोदी ने पाश्नियान का शुक्रिया अदा किया। 


प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के इतर सोमवार को जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल, कोलंबिया के राष्ट्रपति इवान मार्क्वेज और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमाद समेत कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। कतर के अमीर ने योग को वैश्विक स्तर पर और लोकप्रिय बनाने में मोदी के प्रयासों का भी उल्लेख किया। मोदी ने इसके अलावा इटली के प्रधानमंत्री ग्यूसेप कोंते, नाइजर के राष्ट्रपति मोहम्मदू इसूफू, नामीबिया के राष्ट्रपति हेज गिंगोब, मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह, भूटान के प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रूट से भी मुलाकात की। मोदी ने यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरिटा फोर से भी मुलाकात की और भारत में बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण के संबंध में उनकी सरकार के उठाए कदमों को रेखांकित किया।



 

सोशल मीडिया

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सोशल मीडिया लोकतंत्र का एक शक्तिशाली माध्यम है। उन्होंने कहा कि बेहतर राजकाज संचालन में सोशल मीडिया का इस्तेमाल एक 'औजार' के रूप में किया जा सकता है। ब्लूमबर्ग ग्लोबल बिजनेस फोरम को संबोधित करने के बाद सवाल-जवाब के सत्र में प्रधानमंत्री ने कहा कि वह खुद सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया के जरिये फैलाई जाने वाली फर्जी खबरों को लेकर सतर्क रहने को कहा। मोदी ने दुनिया को एक महत्वपूर्ण संदेश में कहा कि लोगों को यदि सोशल मीडिया पर कोई खबर मिलती है तो उन्हें उसे आगे भेजने से पहले खुद उसकी जांच करनी चाहिए।

 


उन्होंने कहा कि किसी सूचना को 'फॉरवर्ड' करने के फैशन को प्रौद्योगिकी के जरिये हल किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने 1999 की कंधार विमान अपहरण की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया चैनल नए थे और उन्होंने इस मामले से संबंधित सभी चीजों का प्रसारण किया। उन्होंने ऐसा माहौल बना दिया, जैसे सरकार दबाव में है। आतंकवादियों ने इस स्थिति का फायदा उठाया। मोदी ने कहा कि इस अपहरण का 'एपिसोड' बंद होने के बाद समाचार चैनलों ने आत्मनिरीक्षण किया और गलतियों को दुरुस्त करने का फैसला किया। 

 

कश्मीर पंडितों का दिल और विश्वास जीता

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका में कश्मीरी पंडितों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान उनका दिल और विश्वास जीत लिया। ह्यूस्टन और अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में कई कश्मीरी पंडित बसे हुए हैं। वे ''हाउडी मोदी'' कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आये थे। प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम के इतर कश्मीरी पंडित समुदाय से मुलाकात की थी।

 


अमेरिका के सबसे पुराने गैर-लाभकारी सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन 'कश्मीरी ओवरसीज एसोसिएशन' की अध्यक्ष शकुन मलिक ने कहा, ''भारत की आजादी के लगभग 70 साल में पहली बार और जातीय सफाये के 30 वर्षों बाद भारत के किसी प्रधानमंत्री ने चिंता जताई और अपनी ही जमीन पर शरणार्थियों की तरह रह रहे कश्मीरी पंडित समुदाय के बारे में मुद्दों को उठाने की इच्छा व्यक्त की।''

 

'ग्लोबल गोलकीपर' पुरस्कार

 

'बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन' ने भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 'ग्लोबल गोलकीपर' पुरस्कार से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री ने यह अहम पुरस्कार मिलने पर कहा, 'महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर मुझे यह पुरस्कार दिया जाना मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है। यह इस बात का प्रमाण है कि अगर 130 करोड़ लोगों की जनशक्ति किसी एक संकल्प को पूरा करने में जुट जाए, तो किसी भी चुनौती पर जीत हासिल की जा सकती है।''

 

बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया को यह समझाने में सफल रहे कि कश्मीर में आतंकवाद के कारण पिछले 30 वर्षों में 42,000 जानें गई हैं और आतंकवाद के अभिशाप से लड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब इधर-उधर की बात करने से परहेज करना चाहिए। प्रधानमंत्री का यह दौरा इस मायने में भी सफल रहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 'कश्मीर' मुद्दे की गंभीरता समझ आ गयी है इसीलिए अब उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच किसी तरह की मध्यस्थता से दूरी बनाते हुए कहा दिया है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष इमरान खान कश्मीर पर ''कोई हल निकाल सकें तो यह अच्छा होगा।'' मोदी है तो मुमकिन है नारा तब सार्थक सिद्ध हो गया जब अमेरिका ने पाकिस्तान से साफ-साफ पूछ लिया कि क्यों सिर्फ कश्मीरी मुस्लिमों की ही चिंता है चीन में रह रहे मुस्लिमों की चिंता क्यों नहीं करते?