एक थे आबिद अली, जर्जर शिव मंदिर की मरम्मत में खर्च कर दी जमा पूंजी


शहडोल के आबिद अली ने मजहब से ऊपर उठकर पेश की सामाजिक समरसता की मिसाल। मंदिर में शिव को जल चढ़ाने लगता है तांता।



    मध्यप्रदेश, शहडोल। आबिद अली का इंतकाल 8 मई 2019 को हो गया है। इसके बाद भी लोग आबिद अली को याद करते हैं। आबिद शहर के वह गुमनाम शख्स थे जो अपने मजहब से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता के लिए काम करते थे। वह हिंदू और मुस्लिम के बीच संप्रदाय नहीं देखते थे, सिर्फ भाईचारा और आपसी सौहार्द के लिए काम करते-करते अपना जीवन वार दिया। आज सावन का तीसरा सोमवार है।


    शहर के पौनांग तालाब में स्थित शिव मंदिर में भक्त जल चढ़ाने पहुंचते हैं। वर्ष 2002-03 के पहले यह मंदिर जर्जर हालत में था। इसी दौरान सोहागपुर के गढ़ी मोहल्ला में रहने वाले आबिद अली की नजर उस शिव मंदिर पर पड़ी। उस दौरान आबिद की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी।


     

    घर में पत्नी और चार बच्चों की परवरिश का जिम्मा। कोई स्थाई रोजगार भी नहीं था। इसके बाद भी आबिद अली ने जर्जर शिव मंदिर के जीर्णोद्धार का जिम्मा उठा लिया। अपने अन्य हिंदू साथियों के साथ मिलकर पौनांग तालाब के शिव मंदिर का जीर्णोद्धार करवा दिया।


    आबिद अली की पत्नी आमना बी बताती हैं कि पौनांग तालाब में स्थित शिव मंदिर के मरम्मत कार्य के लिए पति आबिद ने घर की जमा पूंजी से 2 लाख रुपए खर्च किए थे। आज से 17 साल पहले आमना बी के लिए उन 2 लाख रुपयों की कीमत बहुत थी, लेकिन आबिद अली पर शिव मंदिर की मरम्मत का जुनून इस कदर हावी था कि वे घर के खर्चों में कटौती करने को तैयार थे लेकिन शिव मंदिर के मरम्मत में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते थे।


    पौनांग तालाब का शिव मंदिर ऐतिहासिक है। जब राजाओं की रियासत होती थी तब राजा-महराजा भी उस मंदिर के शिवलिंग में जल चढ़ाने जाते थे। रियासतें खत्म हुईं तो मंदिर का रखरखाव भी ठीक ढंग से नहीं हो रहा था। इस कारण वह दिनोंदिन जीर्णशीर्ण होता जा रहा था। तभी आबिद अली ने मंदिर मरम्मत का जिम्मा संभाला और समाज में सामाजिक समरसता की मिसाल पेश कर दी।


    गणेश मंदिर से भी था आबिद का नाता


    आबिद अली का बाणगंगा के समीप स्थित गणेश मंदिर से भी नाता रहा है। आबिद अली के इस सामाजिक सौहार्द को देखते हुए उन्हें श्री सिद्ध गणेश मंदिर विकास सेवा समिति का सचिव भी बनाया गया था। वे कई सालों तक इस पद पर रहकर मिसाल पेश करते रहे। परिजनों ने बताया कि आबिद ने इस गणेश मंदिर में भी भगवान गणेश के लिए चांदी का मुकुट दान किया था। वे मुस्लिम त्योहारों को भी बड़े उत्साह से मनाते और हिंदुओं के पर्व में भी शामिल होते।


     


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