2% अनाथ नागरिक ही सामान्य हैं...


सुनो सुनो, हर आमोख़ास, हर नक्खास-झक्कास सुनो--


★देश की आबादी के अब तक घोषित लगभग 15% मुस्लिमों, 3%ईसाइयों, 2%सिखों, 2%बौद्धों-जैनियों तथा 2%अन्य अर्थात कुल 24% अल्पसंख्यकों के कष्ट-शोषण निवारण, हित-संवर्धन और व्यक्तिगत-वर्गीय सामाजिक-आर्थिक कल्याण-उत्थान हेतु संविधान द्वारा “राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग” मुस्तैद है… इसके अलावा तमाम पर्सनल लॉ बोर्ड, सेंट्रल बोर्ड, वक्फ़ बोर्ड वग़ैरह अलग से तंदुरुस्ती की रक्षा करते हैं...


★देश की आबादी की अब तक घोषित लगभग 20% अनुसूचित जातियों तथा 9% अनुसूचित जनजातियों अर्थात कुल 29% के कष्ट-शोषण निवारण, हित-संवर्धन और व्यक्तिगत-वर्गीय सामाजिक-आर्थिक कल्याण-उत्थान हेतु संविधान द्वारा “राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति आयोग” मुस्तैद है… इसके अलावा बामसेफ, बीएस4, जातीय संगठनों, विभागीय कल्याण संगठन, सेल इत्यादि के रक्षा-कवच और मिसाइलें अलग से हैं...


★देश की आबादी की अब तक घोषित लगभग 41% OBC जातियों के कष्ट-शोषण निवारण, हित-संवर्धन और व्यक्तिगत-वर्गीय सामाजिक-आर्थिक कल्याण-उत्थान हेतु संविधान द्वारा नवनिर्मित राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग मुस्तैद है… तमाम मज़बूत जातीय संगठनों, और जातीय राजनीतिक दलों के अलावा तमाम संयुक्त संगठन और विभागीय संगठन भी वर्ज़िश में लगे हैं...


कुल मिलाकर उपरोक्त लगभग 94% आबादी किसी न किसी संवैधानिक आयोग अथवा विभाग द्वारा सुरक्षित-संरक्षित है… पिछड़ा वर्ग में घोषित होने हेतु संघर्षरत पाटीदार, मराठा, जाट, गूज़र आदि को देश की आबादी का कुल 1% भी मान लिया जो भविष्य में “राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग” द्वारा सुरक्षित-संरक्षित हो जाएंगे… तो इस प्रकार देश में सामान्य वर्ग की आबादी कागज़ी आंकड़ों के अनुसार 5% से भी कम बचती है… अब यदि सामान्य वर्ग में आधी आबादी महिलाओं की मान ली जाए, मतलब 2.5%... तो उनकी सुरक्षा-संरक्षा-कल्याण हेतु भी संविधान द्वारा “राष्ट्रीय महिला आयोग” उपलब्ध है… इस तरह अंत में बचती है कुल 2.5% अनाथ सामान्य आबादी जिसके लिए संविधान में अलग से कोई क़ानून-आयोग-प्रावधान नहीं है…


अब देश की इस 2.5% सामान्य आबादी में 0.5% उन उद्योगपतियों, व्यवसायियों, बड़े-व्यापारियों, नौकरशाहों, वकीलों, राजनेताओं, जमींदारों, रियासतदारों इत्यादि सामाजिक-आर्थिक तौर पर सक्षम-सम्पन्न लोगों को भी निकाल दिया जाए तो अंत में बचती है कुल 2% अनाथ सामान्य आबादी… बस यही अनाथ 2% सामान्य आबादी ही देश की सभी 100% समस्याओं का मूल है… याद रहे कि देश पर 1947 से पूर्व लगभग 200 वर्ष अँग्रेजों का शासन रहा और उसके पूर्व लगभग 600 वर्ष मुस्लिम शासन रहा...


संविधान द्वारा निर्मित “राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग” उक्त 94% आबादी का ही प्रतिनिधित्व और संरक्षण करता है… यहाँ तक कि देश भर में फैले लगभग 3 करोड़ बांग्लादेशी, पाकिस्तानी, रोहिंग्या घुसपैठियों को भी इस 2% अनाथ भारतीय आबादी से काफ़ी ज़्यादा संरक्षण, समर्थन और सुविधाएं प्राप्त हैं… कश्मीरी पत्थरबाज़ों, राष्ट्र-विरोधी नक्सलियों और अफज़ल गुरु, अज़मल क़साब जैसे आतंकियों के भी मानवाधिकार और विधिक अधिकार इस अनाथ 2% आबादी से कहीं ज़्यादा सुरक्षित हैं... मतलब इस मुल्क़ में 98% आबादी किसी न किसी संवैधानिक विशिष्टता से शक्तिकृत और संरक्षित है, और बचे हुए अनाथ 2% नागरिक ही सामान्य हैं...


यदि देश के इन अनाथ 2% क्रूर नृशंष सामान्य राक्षसों को देश के बाहर कहीं खदेड़ दिया जाए, तो मेरे ख़्याल से देश की सभी 100% समस्याएं हल हो जायेंगीं… हालाँकि इस शेष बची 2% आबादी की वास्तविक स्थिति दो अनाथ बैलों जैसी है, जो बिना चारा-पानी की उम्मीद के दनादन चाबुक खाते हुए भी तन-मन-धन से इस भारत की बैलगाड़ी ढो रहे हैं… इस 2% आबादी की स्थिति गल्ले में पड़े कुछ पांच-दस पैसे वाले चिल्लर जैसी है जो (वोट)बैंक के किसी काम के नहीं… शायद यह आधुनिक सभ्य विश्व के लोकतंत्र में जातिभेद, वर्गभेद, नस्लभेद, वर्णभेद, मानव-प्रतिशोध का निकृष्टतम उदाहरण है... सौभाग्य से मैं भी इसी 2% अनाथ आबादी का ही हिस्सा हूँ… बस इतना ही कहूँगा--


रहिमन देखि बड़ेन को लघु न दीजिये डार।
जहाँ काम आवै सुई काह करै तलवार।। …


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