गुपचुप तरीके से चल रहा भाजपा का ऑपरेशन यूपी

 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


लोकसभा 2019 का चुनाव शुरू होने से पहले कांग्रेस ने अपने एक महारथी को चुनावी मैदान में उतारा। प्रियंका गांधी सीधे महासचिव बनकर आईं तो जिम्मा पूर्वी उत्तर प्रदेश का मिला वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया के जिम्मे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई। लेकिन नतीजा नील बट्टा सन्नाटा रहा। जिसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया और प्रियंका गांधी को पूरे उत्तर प्रदेश की कमान सौंप दी गई। एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी द्वारा संगठन में नई जान फूंकने की कवायद चल रही है। वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ऑपरेशन उत्तर प्रदेश पर गुपचुप तरीके से काम कर रही है। 



खबरों के अनुसार कांग्रेस के कई विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। सूत्रों के अनुसार भाजपा कांग्रेसी विधायकों को पार्टी में शामिल कराने के लिए सामूहिक रुप से दलबदल की योजना बना रही है। बता दें कि प्रदेश में कांग्रेस के सात विधायक हैं। दलबदल कानून के तहत किसी भी दल के दो तिहाई विधायकों या सांसदों के एक साथ दलबदल करने पर उनकी सदस्यता बनी रहती है। ऐसे में भाजपा कम से कम पांच कांग्रेसी विधायकों को अपने पाले में लाने की योजना पर काम कर रही है। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में देश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की अपनी परंपरागत सीट गंवा देने के बाद राहुल की साख और साहस दोनों ने जवाब दे दिया। राहुल ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। जिसके बाद उनका अनुशरण करते हुए कांग्रेस के कई नेताओं के इस्तीफे आए। जिसमें से एक इस्तीफा उनके करीबी, महासचिव और पश्चिमी यूपी के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया का भी था। 


सोशल मीडिया के जरिए योगी सरकार को लगातार अपने निशाने पर लेने वाली प्रियंका प्रदेश की राजनीति में लोकसभा चुनाव के बाद भी लगातार एक्टिव रहीं। जिसके बाद उन्हें पूरे उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दे दी गई। यूपी में वैसे तो विधानसभा चुनाव 2022 में है। लेकिन इससे पहले 12 सीटों पर होने वाले उपचुनाव प्रियंका के लिए अग्निपरीक्षा से कम साबित नहीं होंगे। लोकसभा चुनाव के बाद सपा औऱ बसपा के गठबंधन में पड़ी फूट और बसपा के पहली बार उपचुनाव लड़ने के निर्णय के बीच कांग्रेस भी उपचुनाव को देखते हुए सचिवों को जो सीटें लोकसभा चुनाव में बांटी गई थीं, वे उन इलाकों में बैठकें कर लोगों की पहचान कर रहे हैं, ताकि उन्हें संगठन का जिम्मा दिया जा सके। भारतीय जनता पार्टी ने भी उपचुनाव की तैयारी के लिए कमर कस ली है। जिसके तहत योगी आदित्यनाथ सरकार के परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को उत्तर प्रदेश भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। स्वतंत्र देव सिंह को यूपी के कुर्मी नेताओं में प्रमुख माना जाता है और उन्हें संगठन स्तर पर काम करने का अच्छा अनुभव भी है। स्वतंत्र देव सिंह के सामने इस उपचुनाव में पार्टी को जीत दिलाने की चुनौती होगी।


 


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